होली 2026 शुभ मुहूर्त (Holi 2026 Shubh Muhurat)
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पंचांग के अनुसार, फाल्गुन पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 02 मार्च को शाम 05 बजकर 55 मिनट पर होगी।
पंचांग के अनुसार 2 मार्च को भद्रा पूरे दिन रहेंगी और भद्रा में होलिका दहन नहीं किया जाता है।
लेकिन भद्रा पुच्छ में होलिका दहन कर सकते हैं। ऐसे में भद्रा का पुच्छ 2 मार्च 2026, सोमवार
को रात में 11 बजकर 54 मिनट से रात्रि 01 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। इस दौरान होलिका
दहन कर सकते हैं। इसके अलावा 3 मार्च को सुबह 5:30 से 6:45 के बीच होलिका दहन कर
सकते हैं।
राम जी के पूर्वजों से जुड़ी होली की पौराणिक कथा
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इस कथा के अनुसार भगवान श्री राम के पूर्वज राजा पृथु के समय मैं ढूंढी नामक एक राक्षस ही थी जो अवैध बालकों को खा जाती थी अनेक प्रकार के जब तक से उसने बहुत से देवताओं को पसंद करके वरदान पा लिया था कि उसे कोई भी देवता मानव अस्त्र-शस्त्र नहीं मार सकेगा, ना ही उस पर मौसमों का कोई असर होगा, इस वरदान के बाद उसका आतंक बढ़ गया है क्योंकि उसको मारना असंभव था लेकिन शिव के एक शाप के कारण बालकों की शरारतों से वह मुक्त नहीं थी। राजा पृथु ने ढूंढी के अत्याचारों से तंग आकर राजपुरोहित से उससे छुटकारा पाने का उपाय पूछा, पुरोहित ने कहा यदि फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर जब ना अधिक सर्दी होगी और ना अधिक गर्मी, सब बच्चे एक एक लकड़ी लेकर अपने घर से निकले उसे एक जगह पर रखें और घास फूस रख कर जला दें ।
ऊंचे स्वर में तालियां बजाते हुए मंत्र पढ़ें और अग्नि की प्रदक्षिणा करें।
जोर से हंसे, गाएं और शोर करें तो राक्षसी या तो मर जाएगी या कहीं दूर भाग जाएगी पुरोहित की सलाह का पालन किया गया और जब ढूंढी इतने सारे बच्चों को देखकर अग्नि के समीप आई तो बच्चों ने एक समूह बनाकर नगाड़े बजाते हुए ढूंढी को घेरा, उसको शोरगुल करते हुए नगर के बाहर खदेड़ दिया।
कहते हैं कि आज भी होली पर बच्चे शोरगुल और गाना बजाना करते हैं वह असली प्राचीन परंपरा का ही हिस्सा है ।

