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या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।। धनतेरस की आप सब को बहुत शुभकामनाये।।
पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और संपूर्ण जानकारी
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धनतेरस 2026
6 नवंबर, शुक्रवार
धनत्रयोदशी • कार्तिक कृष्ण पक्ष • दीपावली का प्रथम पर्व
2026 की महत्वपूर्ण जानकारी:
धनतेरस:
6 नवंबर 2026, शुक्रवार।त्रयोदशी तिथि प्रारंभ:
6 नवंबर, सुबह 10:30 बजे।त्रयोदशी तिथि समाप्त:
7 नवंबर, सुबह 10:47 बजे।लक्ष्मी-कुबेर पूजा का शुभ समय:
लगभग शाम 6:11 से रात 8:09 बजे।पूजा के लिए प्रदोष काल का विशेष महत्व है।
ध्यान दें:
मुहूर्त स्थान के अनुसार बदलता है। यहां भोपाल के लिए प्रकाशित शहर-विशिष्ट समय दिया गया है।धनतेरस पूजा विधि 2026 (Dhanteras Puja Vidhi in Hindi)
धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा करने का विशेष महत्व है। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर सुख, शांति, उत्तम स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना की जाती है।
धनतेरस पूजा सामग्री
- माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्ति।
- भगवान कुबेर की तस्वीर या मूर्ति।
- भगवान धन्वंतरि की तस्वीर।
- पूजा की चौकी और लाल कपड़ा।
- रोली, कुमकुम और हल्दी।
- अक्षत (साबुत चावल)।
- फूल और फूलों की माला।
- धूप, अगरबत्ती और कपूर।
- घी और तेल के दीपक।
- फल, मिठाई और पंचामृत।
- गंगाजल और जल से भरा कलश।
- सोने या चांदी के सिक्के।
धनतेरस पूजा करने की पूरी विधि
घर की सफाई और सजावट
धनतेरस से पहले घर की अच्छी तरह सफाई करें। मुख्य दरवाजे पर रंगोली बनाएं और फूलों से सजावट करें। घर के प्रवेश द्वार पर दीपक जलाएं।
पूजा स्थल तैयार करें
शाम को पूजा स्थल पर चौकी रखें और उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। माता लक्ष्मी, भगवान गणेश, भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
संकल्प और गणेश पूजा
हाथ में जल और अक्षत लेकर भगवान का स्मरण करें। इसके बाद भगवान गणेश को फूल, दूर्वा, अक्षत और मिठाई अर्पित करें।
माता लक्ष्मी की पूजा
माता लक्ष्मी को कुमकुम, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। घी का दीपक जलाएं और परिवार में सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
भगवान कुबेर की पूजा
भगवान कुबेर को धन और समृद्धि का देवता माना जाता है। उन्हें फूल, अक्षत और मिठाई अर्पित करें। व्यापार में उन्नति और आर्थिक खुशहाली की कामना करें।
भगवान धन्वंतरि की पूजा
भगवान धन्वंतरि की पूजा करके अच्छे स्वास्थ्य और निरोगी जीवन की प्रार्थना करें।
मंत्र जाप और आरती
माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी के मंत्रों का जाप करें। अंत में श्रद्धापूर्वक आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद वितरित करें।
धनतेरस पर यम दीपदान की विधि
धनतेरस की शाम यमराज के नाम से दीपक जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपदान कहा जाता है।
- सूर्यास्त के बाद मिट्टी का दीपक लें।
- उसमें सरसों का तेल डालें।
- रुई की बत्ती लगाकर दीपक जलाएं।
- परंपरा के अनुसार दक्षिण दिशा की ओर दीपक रखें।
- यमराज से परिवार की सुख-शांति और दीर्घायु की प्रार्थना करें।
6. धनतेरस पर क्या-क्या करना शुभ माना जाता है?
- माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा करें।
- घर के मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं।
- सोना, चांदी या अपनी क्षमता के अनुसार बर्तन खरीदें।
- जरूरतमंद लोगों को भोजन और वस्त्र दान करें।
- घर में स्वच्छता और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें।
- भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना करें।
7. धनतेरस पूजा के बाद क्या करें?
पूजा पूरी होने के बाद माता लक्ष्मी की आरती करें। सभी परिवारजनों को प्रसाद दें। घर में दीपक जलाएं और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।
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धनतेरस के शुभ मंत्र (Dhanteras Mantra)
धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और
भगवान धन्वंतरि के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।1. माता लक्ष्मी का मंत्र
ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥
2. भगवान कुबेर का मंत्र
ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा॥
3. भगवान धन्वंतरि का मंत्र
ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरये अमृतकलशहस्ताय सर्वभयविनाशाय सर्वरोगनिवारणाय नमः॥
4. भगवान गणेश का मंत्र
ॐ गं गणपतये नमः॥
5. महालक्ष्मी गायत्री मंत्र
ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्न्यै च धीमहि।
तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥
धनतेरस पर मंत्र जाप कैसे करें?
स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल पर माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की स्थापना करें।
घी का दीपक जलाएं और फूल अर्पित करें।
श्रद्धा के अनुसार मंत्रों का 11, 21 या 108 बार जाप करें।
अंत में माता लक्ष्मी की आरती करें और प्रसाद बांटें।
